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एलोवेरा (घृतकुमारी): उगाना, साफ़ जेल निकालना और समझदारी से प्रयोग
बालकनी में एलोवेरा का एक पौधा धूप से जली त्वचा, रूखी त्वचा, छोटे-मोटे जलने और हल्के हेयर जेल के लिए ताज़ा जेल देता है। पत्ती को सही तरीके से काटना और उसका रस निकालना सबसे अहम है, और एलोवेरा पीने में लगाने से ज़्यादा सावधानी चाहिए।

आयुर्वेद की दृष्टि से
आयुर्वेद में एलोवेरा को घृतकुमारी या कुमारी कहते हैं और इसे कड़वा, ठंडा और पुनर्जीवन देने वाला बताया गया है, ख़ासकर पित्त — गर्मी, जलन और सूजन — के लिए, और परंपरा से स्त्री प्रजनन स्वास्थ्य और लिवर के लिए। अंदर का पारदर्शी जेल त्वचा को आराम देता है। पर हरे छिलके के ठीक नीचे का पीला रस (लेटेक्स) तेज़ जुलाब और जलन पैदा करने वाला है, इसीलिए इसे निकाल देना ज़रूरी है।
सामग्री
- एलोवेरा (एलो बार्बाडेन्सिस) की एक मोटी, परिपक्व बाहरी पत्ती
- साफ़ चाकू, एक गिलास और साफ़ डिब्बा
बनाने की विधि
- पत्ती को जड़ के पास से काटें और 10–15 मिनट गिलास में सीधा खड़ा रखें ताकि पीला रस बह जाए।
- धोकर काँटेदार किनारे काटें और ऊपर का छिलका उतार दें। चम्मच से पारदर्शी जेल निकालें।
- चिकने जेल के लिए थोड़ा-सा ब्लेंड करें, और साफ़ जार में फ्रिज में 5 दिन तक रखें।
इस्तेमाल का तरीका
- धूप से जली त्वचा, रूखे हिस्सों या रसोई में हल्के जलने पर (बहते पानी से ठंडा करने के बाद) पतली परत लगाएँ।
- हल्के, प्राकृतिक हेयर जेल या रूखे बालों के लिए लीव-इन की तरह प्रयोग करें, या नारियल तेल में मिलाकर धोने से पहले मास्क लगाएँ।
- शेविंग या वैक्सिंग के बाद त्वचा को शांत करने के लिए थपथपाकर लगाएँ।
मददगार आदतें
- एलोवेरा को तेज़ रोशनी, रेतीली मिट्टी और कम पानी पसंद है — ज़्यादा पानी से पौधा मर जाता है।
- पहले बाहर की पत्तियाँ काटें; पौधा बीच से बढ़ता रहता है।
सावधानियाँ
- पहले पैच टेस्ट करें; कुछ लोगों को एलोवेरा से एलर्जी होती है।
- गर्भावस्था, स्तनपान और बच्चों में एलोवेरा जूस या लेटेक्स न पिएँ — इससे मरोड़, दस्त और गर्भावस्था में गर्भाशय में संकुचन हो सकते हैं।
- मुँह से लिया एलोवेरा ब्लड शुगर घटा सकता है और पोटैशियम पर असर डाल सकता है; डायबिटीज़, पेशाब बढ़ाने वाली या दिल की दवा लेते हों तो डॉक्टर से पूछें।
- बड़े, गहरे, छाले वाले या चेहरे के जलने पर डॉक्टरी इलाज चाहिए।



