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पाचन10 मिनट

कब्ज़ के लिए घी वाला गरम दूध और भीगी किशमिश

जब मल सख़्त और सूखा हो, तो आयुर्वेद थोड़ी चिकनाई और गर्माहट बढ़ाने की सलाह देता है। रात को घी वाला गुनगुना दूध और सुबह भीगी किशमिश — यह एक पुराना और सौम्य मेल है।

चित्र में किशमिश की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

आयुर्वेद की दृष्टि से

आयुर्वेद के अनुसार रोज़मर्रा की ज़्यादातर कब्ज़ वात की समस्या है। वात सूखा, ठंडा और रूखा होता है; जब यह बड़ी आँत में बढ़ता है तो मल सख़्त हो जाता है और पेट ठीक से साफ़ नहीं होता। सफ़र, अनियमित खाना, कम पानी, सूखा या पैकेट वाला खाना और घंटों बैठे रहना — ये सब वात बढ़ाते हैं।

इसका हल तेज़ जुलाब नहीं, बल्कि चिकनाई और नियमित दिनचर्या है। घी आँतों को चिकना रखने के लिए जाना जाता है, गरम दूध शांत करता है, और रात भर भीगी किशमिश नरम, मीठी और हल्की रेचक बन जाती है।

सामग्री

  • 1 कप दूध
  • 1 छोटा चम्मच देसी घी
  • 10–12 काली या सुनहरी किशमिश
  • भिगोने के लिए आधा कप पानी

बनाने की विधि

  1. रात को किशमिश को एक छोटी ढकी कटोरी में पानी में भिगो दें।
  2. सोने से पहले दूध को भाप उठने तक गरम करें, कप में डालें और घी मिला दें।

इस्तेमाल का तरीका

  • रात के खाने के लगभग एक घंटे बाद घी वाला दूध गुनगुना पिएँ।
  • अगली सुबह खाली पेट भीगी किशमिश खाएँ और उसका पानी भी पी लें।
  • नीचे दी गई आदतों के साथ एक हफ़्ता करें; ज़्यादातर लोगों को कुछ ही दिनों में सुबह आसानी महसूस होती है।

मददगार आदतें

  • दिन भर में 8–10 गिलास पानी पिएँ, और शुरुआत सुबह उठते ही एक गिलास गुनगुने पानी से करें।
  • रेशा बढ़ाएँ: छिलके समेत मौसमी फल, हरी सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज, दाल और एक चम्मच अलसी।
  • रोज़ सुबह एक ही समय शौच जाएँ और हाजत को टालें नहीं।
  • खाने के बाद 20 मिनट टहलना पेट को चलायमान रखता है।

सावधानियाँ

  • दूध न पचता हो (लैक्टोज़ इनटॉलरेंस) तो दूध छोड़ दें — गुनगुने पानी में एक चम्मच घी विकल्प है।
  • कोलेस्ट्रॉल या वज़न पर नज़र रखने वाले घी एक छोटे चम्मच तक ही रखें।
  • मल में ख़ून, तेज़ दर्द, उल्टी, पेट फूलना, बिना वजह वज़न घटना या 40 की उम्र के बाद शौच की आदत में अचानक बदलाव हो तो डॉक्टर को दिखाएँ।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना जुलाब या अरंडी का तेल नियमित न लें; बच्चों और गर्भावस्था में सलाह ज़रूर लें।