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गैस वाले पेट दर्द में नाभि के आसपास गुनगुना हींग लेप
जब पेट दर्द साफ़ तौर पर गैस का हो, तो देश भर की दादी-नानी नाभि के आसपास थोड़ा हींग का लेप लगाती हैं। गुनगुने पानी और गरम पानी की बोतल के साथ यह एक आराम देने वाला बाहरी उपाय है।

आयुर्वेद की दृष्टि से
हर पेट दर्द एक जैसा नहीं होता। मरोड़ वाला, जगह बदलता दर्द, फूला हुआ पेट और गैस निकलने पर आराम — यह आमतौर पर फँसी हुई वायु होती है, जिसे आयुर्वेद वात का विकार कहता है। गर्माहट पेट की मांसपेशियों को ढीला करती है, और बाहर लगाई गई हींग का ऐसी मरोड़ में लोक-परंपरा में लंबा इस्तेमाल रहा है। यह आराम का उपाय है, निदान नहीं — इसलिए यह जानना ज़रूरी है कि कौन-से दर्द घर पर कभी न सँभालें।
सामग्री
- चुटकी भर हींग
- 1 छोटा चम्मच गुनगुना पानी या गुनगुना तिल/सरसों का तेल
- गरम पानी की बोतल या तवे पर गरम किया तौलिया
- पीने के लिए चुटकी भर अजवाइन वाला एक कप गुनगुना पानी (बड़ों के लिए)
बनाने की विधि
- हींग को गुनगुने पानी या तेल में मिलाकर पतला लेप बना लें।
- तौलिया गरम करें या बोतल भरें — जलाने वाला गरम नहीं।
इस्तेमाल का तरीका
- लेटकर लेप को नाभि के चारों ओर गोलाई में लगाएँ (नाभि के अंदर नहीं)।
- 10–15 मिनट पेट पर गरम तौलिया या बोतल रखें।
- बड़े साथ-साथ अजवाइन वाला पानी धीरे-धीरे पी सकते हैं।
मददगार आदतें
- घुटने छाती से लगाकर या बाईं करवट लेटने से गैस आगे बढ़ती है।
- भारी-तला खाना छोड़ें और अगली बार खिचड़ी जैसा हल्का भोजन लें।
सावधानियाँ
- पहले थोड़ी जगह पर लगाकर देखें; जलन या लाली हो तो धो दें। कटी-छिली त्वचा पर न लगाएँ।
- छोटे बच्चों या कम संवेदना वाले लोगों (जैसे डायबिटीज़ में) पर गरम बोतल बिना निगरानी न रखें।
- तेज़ या लगातार दर्द, नाभि से शुरू होकर दाईं ओर नीचे जाता दर्द, सख़्त पेट, बुखार, उल्टी, मल या उल्टी में ख़ून, या गर्भावस्था में दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर या अस्पताल जाएँ।
- बच्चों में बार-बार पेट दर्द हो तो बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाएँ।






