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पेट फूलने पर गुनगुने पानी में चुटकी भर हींग

गैस से तना हुआ पेट हो तो भारतीय रसोई का जवाब है हींग। भारी खाने के बाद गुनगुने पानी में घुली ज़रा-सी हींग पेट फूलने का सबसे आसान घरेलू उपाय है।

चित्र में सेंधा नमक की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

आयुर्वेद की दृष्टि से

हींग एक सूखी राल है जिसकी तेज़ गंध गरम घी-तेल में पड़ते ही सुहानी हो जाती है — इसीलिए इसे इतनी दालों और राजमा-छोले में डाला जाता है। आयुर्वेद में इसे गरम और तीक्ष्ण माना गया है; यह रुकी हुई वायु को निकालने और मंद अग्नि को जगाने के काम आती है। पुराने रसोइये इसे ख़ास तौर पर गैस बनाने वाली चीज़ों — राजमा, चना, उड़द — में डालते हैं।

पेट फूलना अक्सर जल्दी-जल्दी, देर से या ज़्यादा खाने, भारी मेल, कोल्ड ड्रिंक, या बिना गर्म मसालों के बनी दालों और पत्तागोभी से होता है।

सामग्री

  • छोटी चुटकी (⅛ छोटे चम्मच से कम) अच्छी हींग
  • 1 कप गुनगुना पानी
  • चुटकी भर सेंधा या काला नमक (वैकल्पिक)

बनाने की विधि

  1. हींग और नमक को गुनगुने पानी में घोलकर अच्छी तरह मिलाएँ — मिश्रित हींग में थोड़ा आटा नीचे बैठ सकता है।

इस्तेमाल का तरीका

  • भारी खाने के बाद या पेट तना लगे तब धीरे-धीरे घूँट लेकर पिएँ, दिन में दो बार तक।
  • खाना बनाते समय दाल, राजमा-छोले और पत्तागोभी-फूलगोभी के तड़के में गरम घी या तेल में चुटकी भर हींग डालें।

मददगार आदतें

  • धीरे खाएँ और अच्छी तरह चबाएँ; जल्दी निगलने से हवा भी पेट में जाती है।
  • राजमा-छोले रात भर भिगोएँ और हींग, अदरक व जीरे के साथ अच्छी तरह पकाएँ।
  • पेट फूला हो तो कोल्ड ड्रिंक और च्युइंग गम से बचें।
  • हल्की सैर या कुछ मिनट बाईं करवट लेटने से गैस निकलने में मदद मिलती है।

सावधानियाँ

  • सिर्फ़ चुटकी भर लें — ज़्यादा हींग से जलन, दस्त या सिरदर्द हो सकता है।
  • गर्भावस्था में और शिशुओं के लिए बिना सलाह दवा की तरह इस्तेमाल न करें; शिशु के मुँह में हींग न डालें।
  • एसिडिटी, अल्सर या ख़ून बहने की बीमारी हो तो कम मात्रा में और सिर्फ़ खाने में इस्तेमाल करें।
  • बाज़ार की हींग में अक्सर गेहूँ का आटा मिला होता है — सीलिएक रोग वाले ग्लूटेन-फ़्री ब्रांड चुनें।
  • लगातार पेट फूलना, साथ में वज़न घटना या रात में नींद तोड़ने वाला दर्द हो तो डॉक्टर से जाँच करवाएँ।