पाचन30 मिनट
थके पेट के लिए एक दिन की मूँग दाल खिचड़ी
त्योहारों, शादियों या हफ़्ते भर बाहर खाने के बाद एक दिन सादी मूँग दाल खिचड़ी पाचन को छुट्टी देती है। आयुर्वेद में ‘डिटॉक्स’ का मतलब यही है — भूखा रहना नहीं, बल्कि पोषक, गरम और हल्का भोजन।

आयुर्वेद की दृष्टि से
खिचड़ी — चावल और पीली मूँग दाल, थोड़े घी और हल्के मसालों के साथ नरम पकाई हुई — आयुर्वेद में हर प्रकृति के लिए उपयुक्त मानी जाती है। मूँग सबसे हल्की दाल है, चावल शांत करता है, और जीरा, अदरक व हल्दी पाचन अग्नि को सहारा देते हैं। एक दिन सिर्फ़ खिचड़ी खाना (पारंपरिक ‘एक आहार’) सुस्त, भारी पेट को उपवास की कमज़ोरी के बिना फिर से संतुलित होने देता है।
सामग्री
- आधा कप चावल और आधा कप पीली मूँग दाल, धुली हुई
- 4–5 कप पानी
- 1 छोटा चम्मच घी, ½ छोटा चम्मच जीरा, चुटकी भर हींग
- ½ छोटा चम्मच कसा अदरक, ¼ छोटा चम्मच हल्दी, स्वादानुसार सेंधा नमक
- मुट्ठी भर कटी लौकी, गाजर या पालक (वैकल्पिक)
बनाने की विधि
- चावल-दाल को 20 मिनट भिगोकर पानी निकाल दें।
- कुकर में घी गरम करें, जीरा और हींग डालें, फिर अदरक और हल्दी।
- चावल, दाल, सब्ज़ियाँ, नमक और पानी डालें। 3–4 सीटी तक बहुत नरम होने तक पकाएँ।
- अच्छी तरह चलाएँ; बहुत गाढ़ी हो तो गरम पानी डालें — दलिये जैसी होनी चाहिए।
इस्तेमाल का तरीका
- एक दिन नाश्ते, दोपहर और रात में गरम खिचड़ी खाएँ, बीच-बीच में गुनगुना पानी या अदरक की चाय लें।
- ऊपर से एक चम्मच घी और थोड़ा नींबू या धनिये की चटनी स्वाद बढ़ा देते हैं।
- अगले दिन हल्के भोजन से शुरू करके धीरे-धीरे सामान्य खाने पर लौटें।
मददगार आदतें
- बिना स्क्रीन के, धीरे-धीरे चबाकर खाएँ और पेट ठसाठस भरने से पहले रुक जाएँ।
- जल्दी सोएँ; आराम भी इस रीसेट का हिस्सा है।
सावधानियाँ
- डायबिटीज़ हो तो चावल कम (दाल और सब्ज़ी ज़्यादा) रखें, मात्रा संतुलित रखें और दवा व शुगर की जाँच जारी रखें।
- किडनी रोग हो तो नमक और दाल की मात्रा डॉक्टर से पूछ लें।
- खिचड़ी वाला दिन हल्के भारीपन के लिए है; लगातार अपच, दर्द, उल्टी या वज़न घटने पर डॉक्टर को दिखाएँ।




