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निर्गुंडी की पत्ती, बाहरी गर्म सिकाई
निर्गुंडी के पत्ते अकड़ी त्वचा पर बाहरी गर्म सिकाई के लिए हैं, थोड़े तिल के तेल के साथ कपड़े में बंधे। यह पेय नहीं, कटी त्वचा पर नहीं, और दर्द का इलाज नहीं।

निर्गुंडी की बाहरी गर्म सिकाई
निर्गुंडी तेज गंध वाली पत्ती है। इस रसोई के तरीके में पत्ते गुनगुने किए जाते हैं, उन पर थोड़ा तिल का तेल लगता है, और वे साफ सूती कपड़े में बंधते हैं। वह पोटली अकड़े घुटने या कंधे पर कुछ मिनट रहती है। पत्ता मुंह में नहीं जाता।
सिकाई वह आराम है जिसे त्वचा शिकायत करे तो तुरंत हटा दें। यह गठिया, चोट या सूजन का इलाज नहीं करती। कटी त्वचा, रैश, या गर्भावस्था में पेट पर इस्तेमाल न करें। लालिमा, चुभन या दर्द बढ़े तो उतार दें।
सामग्री
- ताजा निर्गुंडी पत्तियों की एक मुट्ठी
- तिल के तेल की कुछ बूंदें
- साफ सूती कपड़ा
- पत्ते नरम करने हों तो गुनगुना पानी
बनाने की विधि
- पत्ते धोकर सुखाएं, और सूखी कढ़ाई में तिल के तेल की कुछ बूंदों के साथ तब तक गरम करें जब तक लचकें, जलें नहीं।
- गुनगुने पत्ते सूती कपड़े में ऐसे बांधें कि कटी त्वचा पर कुछ न चूए। पोटली गर्म लगे, कभी बहुत गरम नहीं।
इस्तेमाल का तरीका
- कपड़े की पोटली अकड़े जोड़ की साबुत त्वचा पर कुछ मिनट रखें।
- उठाकर त्वचा देखें। रंग बदले तो बंद कर दें।
- इस्तेमाल किए पत्ते फेंक दें। बाद में उन्हें चाय के लिए न उबालें।
मददगार आदतें
- घुटने पर लगाने से पहले कपड़ा कलाई के अंदर पर आजमाएं।
- कढ़ाई अच्छी तरह धोएं। निर्गुंडी की गंध रसोई में टिकती है।
सावधानियाँ
- निर्गुंडी की सिकाई सिर्फ बाहरी है। पत्ते या कढ़ाई का पानी न पिएं।
- कटे स्थान, रैश या फटी त्वचा पर न रखें, और गर्भावस्था में पेट पर छोड़ दें।
- यह जोड़ की बीमारी या चोट का इलाज नहीं। गर्म, सूजा या चोटिल जोड़ को डॉक्टर चाहिए, और गर्म सिकाई नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या दर्द के लिए निर्गुंडी का रस पी सकते हैं?
- नहीं। यह गाइड सिर्फ बाहरी कपड़े की सिकाई है। पेय नहीं और दर्द का इलाज नहीं।
सिकाई कितनी गर्म हो?
- गुनगुनी, आरामदेह कपड़े जैसी। कलाई पर न रुक सके तो बहुत गर्म है।
क्या सिकाई बांधकर सो सकते हैं?
- नहीं। जागते हुए कुछ मिनट काफी हैं ताकि त्वचा देख सकें।





