पाचन8 मिनट
हींग-जीरा पानी: भारी भोजन के बाद हींग की चुटकी और भुना जीरा
भारी भोजन के बाद भुने जीरे और हींग की चुटकी वाला गुनगुना पानी रसोई का जाना-पहचाना अंत है। चुटकी चुटकी ही रहनी चाहिए। ज़्यादा हींग उसी घूँट का बड़ा रूप नहीं है।

जीरे के पानी में हींग चुटकी जितनी क्यों रहती है
हींग दाल और कढ़ी में बहुत कम पड़ती है, क्योंकि थोड़ी सी पूरे बर्तन का स्वाद बदल देती है। यहाँ वही चुटकी गुनगुने पानी में जाती है, उस जीरे के साथ जिसे कुछ सेकंड भून लिया गया हो। प्याली भारी भोजन के बाद की है, जब पेट गैस और खाने से भरा लगे।
चुटकी से आगे हींग तीखी हो जाती है। ज़्यादा डालने पर पेट जल सकता है और महक दिन भर रह सकती है। यह सहायक पानी है, दर्द वाले पेट को घर पर दवा बनाने की छूट नहीं। सीने में दर्द, बार-बार उल्टी, या पेट जो सख्त पड़ा रहे, उसके लिए डॉक्टर चाहिए।
सामग्री
- हींग की एक चुटकी
- आधा छोटा चम्मच जीरा, भूनने के लिए
- एक कप गुनगुना पानी
बनाने की विधि
- जीरे को सूखा भूनें जब तक गर्म महक आए, फिर हल्का कूट लें।
- भुना जीरा और सिर्फ़ हींग की एक चुटकी गुनगुने पानी में चलाएँ।
इस्तेमाल का तरीका
- भारी भोजन के बाद एक कप धीरे पिएँ।
- उसी घंटे दूसरी प्याली में हींग की दूसरी चुटकी न लें।
- गुनगुना पिएँ, उबलता नहीं, और शाम भर की बड़ी बोतल भी नहीं।
मददगार आदतें
- जीरा सिर्फ़ खुशबू आने तक भूनें। जला जीरा प्याली को कड़वा कर देता है।
- हींग में आटा मिला हो तब भी चुटकी ही रखें।
सावधानियाँ
- भारी भोजन के बाद गुनगुने पानी में हींग की चुटकी और भुना जीरा लें।
- चुटकी चुटकी ही रहे। ज़्यादा हींग बेहतर नहीं है।
- पेट जले तो रोक दें। सीने में दर्द, मल में खून, बार-बार उल्टी, या पेट सख्त रहे तो डॉक्टर से मिलें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
खाना बहुत भारी हो तो क्या हींग का छोटा चम्मच डाल दूँ?
- नहीं। खाना कितना भी भारी हो, चुटकी चुटकी ही रहे।
क्या यह सुबह खाली पेट पीना चाहिए?
- यह प्याली भारी भोजन के बाद की है, सुबह खाली पेट की खुराक नहीं।
क्या कच्चा जीरा भुने जीरे की जगह चल जाएगा?
- जीरा थोड़ा भूनें। इस उपाय में भुना जीरा है, कच्चा चम्मच नहीं।





