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खुजली वाली, पसीने के मौसम की त्वचा के लिए नीम पत्ती का स्नान
मुट्ठी भर नीम की पत्तियाँ उबालकर वह पानी नहाने के पानी में मिलाना, बरसात और गर्मी में खुजलाती त्वचा को ताज़ा करने का पुराना भारतीय तरीका है। यह आरामदायक है, अपनी मिट्टी जैसी ख़ुशबू वाला है, और बहुत आसान है।

आयुर्वेद की दृष्टि से
भारतीय घरों में नीम की ख़ास जगह है — दरवाज़ों पर टाँगा जाता है, दातुन के काम आता है, और बरसात में नहाने के पानी में डाला जाता है, जब नम गर्मी पसीने के दाने और त्वचा की छोटी-मोटी परेशानियाँ बढ़ाती है। आयुर्वेद नीम को कड़वा, ठंडा और शोधक बताता है, जो त्वचा की पित्त और कफ वाली स्थितियों के अनुकूल है। नीम स्नान संक्रमण का इलाज नहीं, पर जब मौसम त्वचा को चुभता-सा बना दे तो यह एक सुखद, सौम्य आदत है।
सामग्री
- एक बड़ी मुट्ठी (लगभग 20–30) ताज़ी नीम पत्तियाँ, धुली हुई
- 2 लीटर पानी
- नहाने के लिए एक बाल्टी गुनगुना पानी
बनाने की विधि
- नीम की पत्तियों को 2 लीटर पानी में 10–15 मिनट उबालें, जब तक पानी हल्का हरा न हो जाए।
- थोड़ा ठंडा करके छान लें।
इस्तेमाल का तरीका
- नीम का पानी नहाने की बाल्टी में मिलाएँ और हमेशा की तरह नहाएँ।
- त्वचा की सिलवटों पर ध्यान देते हुए थपथपाकर सुखाएँ और साफ़, सूखे सूती कपड़े पहनें।
- उमस भरे मौसम में हफ़्ते में दो-तीन बार करें।
मददगार आदतें
- गीले कपड़े और अंतर्वस्त्र जल्दी बदलें; सिलवटों को अच्छी तरह सुखाएँ।
- बहुत गरम पानी और तेज़ साबुन से बचें, इनसे खुजली बढ़ती है।
सावधानियाँ
- नीम का पानी आँखों से दूर रखें; संवेदनशील त्वचा हो तो पहले पैच टेस्ट करें।
- यहाँ नीम सिर्फ़ बाहरी इस्तेमाल के लिए है — बच्चों को नीम का पानी या नीम का तेल कभी पीने को न दें।
- गोल लाल चकत्तों वाली खुजली, फैलते दाने, रिसाव, बुखार, या बिना दानों के पूरे शरीर में खुजली (जो लिवर, किडनी या थायरॉइड से जुड़ी हो सकती है) हो तो डॉक्टर को दिखाएँ।





