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भीगी हुई सुबह की मूंगफली

रात भर भीगी हुई मूंगफली की छोटी मुट्ठी सुबह का सादा नाश्ता है। यह बड़ी कटोरी नहीं। जिन्हें मूंगफली से एलर्जी हो वे न खाएँ।

रसोई के पटरे पर स्टील की कटोरी में साफ पानी और भीगी मूंगफली की छोटी मुट्ठी, पास में छन्नी और चम्मच।

सुबह भीगी मूंगफली की छोटी मुट्ठी

कच्ची मूंगफली रात भर पानी में रहने पर सुबह तक नरम हो जाती है। पानी निथारकर धोई हुई छोटी मुट्ठी नाश्ते के साथ चबाने के लिए काफी है। भिगोना केवल नरम करने का तरीका है। इससे मूंगफली दवा नहीं बन जाती।

मूंगफली की एलर्जी पर पूरा रुकना है। मुट्ठी चुपचाप पूरी कटोरी न बन जाए। यह खाने के साथ का भोजन है, इस बात का वादा नहीं कि रोग-प्रतिरोध बढ़ जाएगा।

सामग्री

  • कच्ची मूंगफली की छोटी मुट्ठी
  • रात भर भिगोने के लिए साफ पानी
  • ढक्कन वाली कटोरी

बनाने की विधि

  1. मूंगफली धोकर कटोरी में साफ पानी से ढक दें।
  2. रात भर रहने दें, सुबह पानी निथारें और दोबारा धोकर खाएँ।

इस्तेमाल का तरीका

  • सुबह एक छोटी मुट्ठी खाएँ।
  • नाश्ते के साथ या बाद में अच्छी तरह चबाएँ।
  • दिन भर कटोरी दोबारा न भरते जाएँ।

मददगार आदतें

  • भीगने का पानी खट्टा महके तो फेंक दें और ताज़ी मूंगफली से फिर भिगोएँ।
  • छिलका अटके तो भिगोने के बाद रगड़कर उतार सकते हैं।

सावधानियाँ

  • मूंगफली या सूखे मेवे से एलर्जी हो तो न खाएँ।
  • मात्रा छोटी मुट्ठी है। बड़ी कटोरी भारी नाश्ता है।
  • यह खाना है, बेहतर रोग-प्रतिरोध का वादा नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भीगी मूंगफली किसे नहीं खानी चाहिए?

जिन्हें मूंगफली या मेवे से एलर्जी हो, वे न खाएँ।

मुट्ठी का मतलब कितनी मूंगफली?

सुबह एक छोटी मुट्ठी। उसे पूरी कटोरी न बनाएँ।

क्या रात भर भिगोने से मूंगफली दवा बन जाती है?

नहीं। भिगोने से वह नरम होती है। नाश्ता रहती है, उपचार नहीं।
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