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अकड़े घुटने के लिए नीरगुंडी के पत्तों की गरम पट्टी
नीरगुंडी के पत्ते गरम करके कपड़े में बाँधना, ठंड या देर तक बैठने के बाद अकड़े घुटने की पुरानी घरेलू पट्टी है। पोटली कुछ मिनट त्वचा पर रहती है, खाई नहीं जाती।

अकड़े घुटने पर नीरगुंडी की गरम पट्टी
ठंडी सुबह या देर तक कुर्सी पर बैठने से घुटना कड़ा लग सकता है। कई घर शाम के तेल से पहले मुट्ठी भर नीरगुंडी के पत्ते गर्म करके जोड़ पर रखते हैं।
आयुर्वेद ऐसी अकड़न को वात से जोड़ता है और नीरगुंडी को यहाँ त्वचा पर लगाता है, पीने के लिए नहीं। यह साधारण कड़े घुटने के आराम के लिए है। गर्म, सूजा या चोट वाला जोड़ डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
सामग्री
- मुट्ठी भर धुले हुए ताज़े नीरगुंडी के पत्ते
- एक साफ़ सूती कपड़ा
- पत्तों को हल्का गीला करने के लिए 1 छोटा चम्मच तिल का तेल
बनाने की विधि
- नीरगुंडी के पत्तों को हल्का मसलें, तिल का तेल छिड़कें और ढीले कपड़े की पोटली बाँधें।
- पोटली को ढके गरम पानी के बर्तन पर तब तक गर्म करें जब तक कलाई पर सुखद लगे, तेज़ गर्म नहीं।
इस्तेमाल का तरीका
- घुटने को सहारा देकर बैठें और गरम पोटली अकड़े हिस्से पर 5 से 8 मिनट रखें।
- ठंडी हो जाए तो एक बार फिर गर्म करके रखें। त्वचा शांत दिखे तब हटा दें।
- इसे सिर्फ़ घुटने के बाहर, अकड़े दिन में एक बार लगाएँ, फिर पोटली हटा दें।
मददगार आदतें
- दिन में थोड़ी आसान सैर शाम की पट्टी को ज़्यादा सुकून भरा बना सकती है।
- पास सूखा कपड़ा रखें, ताकि त्वचा गुलाबी होते ही पोटली उठा सकें।
सावधानियाँ
- यह पट्टी सिर्फ़ बाहर की है। गरम पत्ते न खाएँ और तेल आँख में न जाने दें।
- कटी त्वचा, रैश, या मोच-गिरने के बाद गर्म और सूजे घुटने पर न लगाएँ।
- जलन या खुजली हो तो रोक दें। बुखार, अटकने वाला घुटना, या नींद तोड़ने वाला दर्द डॉक्टर को दिखाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या सूखे नीरगुंडी पत्तों से पट्टी बन सकती है?
- ताज़े पत्ते ज़्यादा बराबर गर्म होते हैं। सिर्फ़ सूखे हों तो थोड़ा तिल का तेल और गुनगुना पानी डालकर कपड़े में बाँधें।
नीरगुंडी की पोटली कितनी देर घुटने पर रहे?
- कुछ मिनट काफ़ी हैं। इसे रखकर सोएँ नहीं, और त्वचा ज़्यादा गर्म लगे तो तुरंत हटा दें।
घुटना सूजा हो तो क्या यही पट्टी काफ़ी है?
- नहीं। यह साधारण अकड़न के लिए गरम कपड़ा है। सूजा, लाल या चोट वाला घुटना डॉक्टर को दिखाएँ।




