नींद और तनाव8 मिनट
शाम को कुछ मिनट शीतली सांस
शीतली ठंडी सांस है, जो शाम को कुछ मिनट की जाती है और पास में सादा पानी रहता है। सर्दी या अस्थमा हो तो छोड़ दें। यह तनाव या अनिद्रा का इलाज नहीं करती।

कुछ मिनट शीतली, और कब छोड़ें
शीतली में जीभ को नलकी की तरह मोड़ा जाता है। मुँह से धीरे साँस अंदर लेते हैं, होंठ बंद करते हैं, और नाक से साँस छोड़ते हैं। शाम के कुछ शांत मिनट ही पूरा अभ्यास है। सादा पानी पास में इसलिए रहता है कि बाद में मुँह सूखा लगे तो घूँट लिया जा सके। पानी में कुछ नहीं डाला जाता।
सर्दी या अस्थमा हो तो शीतली छोड़ दें। यह सांस ठंडी होती है, इसलिए बंद नाक या भारी सीने के साथ मेल नहीं खाती। जीभ बिना जोर के न मुड़े तो नलकी जबरदस्ती न बनाएँ। चक्कर आए तो रुक जाएँ। यह अभ्यास चिंता, अनिद्रा या किसी बीमारी का इलाज नहीं है।
सामग्री
- सादे पानी का एक गिलास, मुँह सूखा लगे तभी बाद में घूँट
- कमरे के तापमान का पानी, बर्फ वाला नहीं
- पानी में न जड़ी, न नमक, न मिठास
बनाने की विधि
- रसोई के शांत कोने में आराम से बैठें, पानी का गिलास पास हो, ठंडी हवा की लाइन में नहीं।
- देखें कि जीभ बिना जोर नलकी बने या नहीं। न बने तो अभ्यास छोड़ दें।
इस्तेमाल का तरीका
- मोड़ी जीभ से धीरे साँस लें, मुँह बंद करें, और नाक से साँस छोड़ें।
- सिर्फ कुछ मिनट जारी रखें, फिर रुककर शांत बैठें।
- सर्दी या अस्थमा हो तो पूरा अभ्यास छोड़ दें।
मददगार आदतें
- छोटा दौर काफी है। सिर हल्का लगने तक जारी रखने की जरूरत नहीं।
- पानी अभ्यास खत्म होने के बाद ही पिएँ, और तभी जब मुँह सूखा लगे।
सावधानियाँ
- सर्दी या अस्थमा हो तो शीतली न करें।
- चक्कर, साँस की कमी या बेचैनी हो तो रुक जाएँ।
- यह सांस तनाव, अनिद्रा या किसी बीमारी का इलाज नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शीतली किसे छोड़ देनी चाहिए?
- जिन्हें सर्दी या अस्थमा हो। नाक बंद हो या सीना भारी लगे तब भी छोड़ दें।
पानी किस काम का है?
- शीतली में पानी के अंदर कुछ नहीं डाला जाता। बाद में मुँह सूखा लगे तभी सादा पानी पिएँ।
अभ्यास कितनी देर का है?
- शाम को कुछ मिनट। चक्कर आए तो रुकें। यह अनिद्रा या तनाव का इलाज नहीं।







