पाचन5 मिनट
दोपहर के भोजन के साथ मसाला छाछ (तक्र)
भुने जीरे वाली ताज़ी, पतली छाछ को आयुर्वेद में पाचन के लिए सबसे अच्छे पेयों में गिना गया है। यह हल्की होती है, पेट को ठंडक देती है और झटपट बन जाती है।

सामग्री
- ¼ कप घर का ताज़ा दही
- ¾ कप पानी
- ¼ छोटा चम्मच भुना जीरा पाउडर
- एक चुटकी सेंधा नमक; थोड़ा कटा हरा धनिया या पुदीना
बनाने की विधि
- दही और पानी को मथनी या व्हिस्क से तब तक मथें जब तक झाग न बन जाए।
- भुना जीरा, नमक और कटी पत्तियाँ डालकर अच्छी तरह मिला लें।
इस्तेमाल का तरीका
- दोपहर के भोजन के साथ या उसके तुरंत बाद एक गिलास पिएँ।
- रात में न लें — आयुर्वेद के अनुसार रात में दही से बनी चीज़ें भारी होती हैं।
सावधानियाँ
- ताज़ा दही ही लें — बहुत खट्टा या बासी दही एसिडिटी बढ़ा सकता है।
- सर्दी, खाँसी या गले में ख़राश हो तो छाछ न लें।
- दूध से एलर्जी हो तो न लें; लैक्टोज़ से परेशानी हो तो पहले थोड़ी मात्रा आज़माएँ।





