शीतपित्ती (पित्ती, हाइव्स) के घरेलू उपाय: ठंडी पट्टी, ओट्स स्नान और कारण की पहचान
शीतपित्ती (हाइव्स, अर्टिकेरिया) में त्वचा पर अचानक उभरे, खुजलीदार ददोरे आते हैं जो शरीर पर जगह बदलते रहते हैं। शीतपित्ती के ये घरेलू उपाय ठंडी पट्टी, गुनगुने ओट्स स्नान और एलोवेरा से खुजली शांत करते हैं, और एक आसान डायरी से पता चलता है कि यह किस वजह से उभरती है।

ज़रूरी: यह नुस्खा केवल एक सहायक घरेलू उपाय है। डॉक्टर की लिखी दवाइयाँ लेते रहें, अपनी रीडिंग जाँचते रहें और कुछ भी नया शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।
शीतपित्ती के बारे में
शीतपित्ती तब होती है जब त्वचा हिस्टामिन छोड़ती है, अक्सर किसी खाने, दवा, कीड़े के काटने, संक्रमण, गर्मी, दबाव या तनाव की प्रतिक्रिया में। ज़्यादातर बार यह कुछ घंटों से दिनों में चली जाती है; छह हफ़्ते से ज़्यादा चले तो इसे क्रॉनिक कहते हैं और डॉक्टर की जाँच ज़रूरी है।
भारतीय घरों में शीतपित्ती को ठंडे पानी की पट्टी और एलोवेरा जैसे ठंडक देने वाले तरीक़ों से शांत करने की परंपरा है।
सामग्री
- साफ़ सूती कपड़ा और ठंडा पानी या कपड़े में लिपटी बर्फ़
- आधा कप सादे ओट्स
- ताज़ा एलोवेरा जेल
बनाने की विधि
- नहाने के लिए ओट्स को मलमल में बाँध लें।
- धुले एलोवेरा पत्ते से ताज़ा जेल निकालें।
इस्तेमाल का तरीका
- जब भी खुजली तेज़ हो, ददोरों पर 10 मिनट ठंडी पट्टी रखें।
- ओट्स की पोटली पानी में घुमाकर गुनगुने पानी से नहाएँ।
- खुजली वाली जगह पर एलोवेरा जेल की पतली परत लगाएँ।
मददगार आदतें
- हर बार से पहले खाए खाने, दवाइयों और गतिविधियों की डायरी रखें।
- ढीले सूती कपड़े पहनें, गर्म पानी से नहाने और टाइट बेल्ट या पट्टियों से बचें।
- ठंडे रहें; कुछ लोगों में गर्मी और पसीना शीतपित्ती उभारते हैं।
सावधानियाँ
- शीतपित्ती के साथ होंठ, जीभ या गले में सूजन, साँस में तकलीफ़, चक्कर या बेहोशी हो तो तुरंत इमरजेंसी मदद लें।
- डॉक्टर से पूछे बिना चल रही दवाइयाँ बंद न करें।
- शीतपित्ती बार-बार हो, कुछ दिनों से ज़्यादा रहे या बुख़ार व जोड़ों के दर्द के साथ हो तो डॉक्टर को दिखाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शीतपित्ती को घर पर जल्दी कैसे शांत करें?
- ठंडी पट्टी, गुनगुना ओट्स स्नान और ढीले कपड़े खुजली शांत कर सकते हैं। डॉक्टर एंटीहिस्टामिन की सलाह भी दे सकते हैं।
शीतपित्ती किन कारणों से होती है?
- खाना, दवाइयाँ, कीड़े का काटना, संक्रमण, गर्मी, त्वचा पर दबाव और तनाव आम कारण हैं, हालाँकि कभी-कभी कोई कारण नहीं मिलता।
शीतपित्ती कब इमरजेंसी होती है?
- चेहरे, होंठ या गले में सूजन, साँस में तकलीफ़ या बेहोशी जैसा लगे तो तुरंत इमरजेंसी इलाज चाहिए।









