मुँह की देखभाल5 मिनट
मुँह के छालों में आराम: शहद-हल्दी, नारियल और ठंडा खाना
मुँह के छाले खाना और बोलना तक दर्दनाक बना देते हैं। चुटकी भर हल्दी वाला शहद छाले पर लगाना, नारियल के दूध या ठंडी छाछ से कुल्ला करना और कुछ दिन सादा, ठंडक देने वाला खाना — इनसे छाले आमतौर पर जल्दी भरते हैं।

आयुर्वेद की दृष्टि से
ज़्यादातर छोटे छाले 7–10 दिन में अपने-आप ठीक हो जाते हैं। ये अक्सर तनाव, नींद की कमी, गाल कट जाने, बहुत तीखे खाने, कब्ज़ या कुछ विटामिनों की कमी से होते हैं। आयुर्वेद इन्हें पाचन तंत्र और मुँह में बढ़े पित्त — गर्मी — का संकेत मानता है, और ठंडी, शांत करने वाली चीज़ें सुझाता है: घी, शहद, नारियल और हल्के कसैले पदार्थ।
सामग्री
- ½ छोटा चम्मच शहद में ज़रा-सी हल्दी
- ¼ कप ताज़ा नारियल का दूध या पतली छाछ
- चाहें तो चबाने के लिए कुछ तुलसी पत्तियाँ, या थोड़ा घी
बनाने की विधि
- शहद और हल्दी मिलाकर लेप बना लें।
- नारियल का दूध या छाछ ठंडी रखें, बर्फ़ीली नहीं।
इस्तेमाल का तरीका
- खाने के बाद साफ़ उँगली या कॉटन बड से शहद-हल्दी छाले पर लगाएँ; 15 मिनट तक कुछ न खाएँ-पिएँ। दिन में दो-तीन बार।
- दिन में दो बार नारियल के दूध या छाछ को एक मिनट मुँह में घुमाकर कुल्ला करें।
- रात को सोते समय थोड़ा घी लगाना भी एक पारंपरिक विकल्प है।
मददगार आदतें
- नरम, सादा खाना खाएँ: खिचड़ी, दही-चावल, केला; ठीक होने तक मिर्च, बहुत गरम पेय और खट्टे अचार से बचें।
- पेट साफ़ रखें, पानी पिएँ और समय पर सोने की कोशिश करें।
- नरम टूथब्रश लें और देखें कि कोई नुकीला दाँत या डेंचर तो नहीं रगड़ रहा।
सावधानियाँ
- एक साल से छोटे बच्चे को शहद न दें।
- थोड़ी देर चुभन हो सकती है — यह सामान्य है; दर्द बढ़े तो बंद करें।
- 2–3 हफ़्ते से ज़्यादा रहने वाला, बिना दर्द के भी न भरने वाला, बार-बार होने वाला, बहुत बड़ा, या बुखार व निगलने में दिक़्क़त के साथ छाला हो तो डॉक्टर या दंत चिकित्सक को दिखाएँ। न भरने वाले सफ़ेद या लाल धब्बों की जाँच ज़रूरी है, ख़ासकर तंबाकू या गुटखा खाने वालों में।







