मुँह की देखभाल3 मिनट
सौंफ, इलायची और जीभ की सफ़ाई से ताज़ा साँस
खाने के बाद का साधारण मुखवास — सौंफ, एक इलायची या एक लौंग — मुँह को प्राकृतिक रूप से ताज़ा करता है। इसके साथ रोज़ जीभ साफ़ करना और भरपूर पानी पीना हो तो मुँह की बदबू आमतौर पर दूर हो जाती है।

आयुर्वेद की दृष्टि से
ज़्यादातर बदबू मुँह से ही शुरू होती है: जीभ के पिछले हिस्से, दाँतों के बीच और मसूड़ों पर जमे खाने के कण और बैक्टीरिया। मुँह सूखना, खाना छोड़ना, धूम्रपान, प्याज़-लहसुन और बंद साइनस इसे बढ़ाते हैं। आयुर्वेद की सुबह की दिनचर्या में हमेशा से जिह्वा निर्लेखन — धातु की पट्टी से जीभ साफ़ करना — शामिल रहा है, और खाने के बाद ख़ुशबूदार बीज चबाना मुँह ताज़ा करने और पाचन के लिए।
सामग्री
- ½ छोटा चम्मच सौंफ, चाहें तो हल्की भुनी हुई
- 1 हरी इलायची या 1 लौंग
- स्टील या ताँबे की जीभी
बनाने की विधि
- भुनी सौंफ और इलायची की एक छोटी डिब्बी खाने की मेज़ के पास रखें।
इस्तेमाल का तरीका
- रोज़ सुबह ब्रश के बाद जीभ को पीछे से आगे की ओर 7–10 बार हल्के से साफ़ करें, हर बार जीभी धोते हुए।
- खाने के बाद सौंफ या इलायची दो-तीन मिनट धीरे-धीरे चबाएँ।
- हर भोजन और नाश्ते के बाद पानी से कुल्ला करें।
मददगार आदतें
- दिन में दो बार ब्रश करें और दिन में एक बार फ़्लॉस या इंटरडेंटल ब्रश का इस्तेमाल करें।
- नियमित पानी पिएँ — सूखे मुँह से ज़्यादा बदबू आती है।
- नाश्ता न छोड़ें; लंबे समय तक भूखा रहने से भी साँस में बदबू आती है।
सावधानियाँ
- जीभ हल्के से साफ़ करें — मक़सद सफ़ाई है, जीभ खुरचना नहीं।
- होटलों की चीनी चढ़ी सौंफ में शक्कर होती है; सादी सौंफ बेहतर है, ख़ासकर डायबिटीज़ में।
- अच्छी सफ़ाई के बाद भी बदबू बनी रहे तो मसूड़ों की बीमारी, दाँतों में सड़न, टॉन्सिल स्टोन, साइनस संक्रमण, एसिड रिफ़्लक्स या अनियंत्रित डायबिटीज़ हो सकती है — दंत चिकित्सक या डॉक्टर को दिखाएँ।



