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दोपहर के खाने के बाद पके पपीते की छोटी कटोरी, जूस क्लींज नहीं
खाने के बाद पका पपीता फल की छोटी कटोरी है, लंबे गिलास का जूस नहीं और क्लींज नहीं। नींबू का निचोड़ और सेंधा नमक की चुटकी वैकल्पिक हैं। विचार इतना है कि खाने को हल्का अंत मिले।

खाने के बाद फल, मात्रा छोटी
पका पपीता नरम, हल्का और भारतीय नाश्ते की थाली में जाना-पहचाना है। दोपहर के खाने के बाद कुछ टुकड़े भोजन हैं। पूरे फल का जूस निकालकर उसे क्लींज कहना अलग और ज़्यादा भार है।
आयुर्वेद सिर्फ़ फल नहीं, मात्रा और समय भी देखता है। पकी छोटी कटोरी उस खाने को हल्का अंत दे सकती है, बिना अग्नि से बड़ी कच्ची थाली का काम लिए। यह डॉक्टर का विकल्प नहीं है।
सामग्री
- पके पपीते की एक छोटी कटोरी
- चाहें तो नींबू का निचोड़
- चाहें तो सेंधा नमक की चुटकी
बनाने की विधि
- पका पपीता छीलें, बीज निकालें और एक छोटी कटोरी टुकड़े काटें।
- नींबू और सेंधा नमक तभी डालें जब चाट जैसा स्वाद चाहिए।
इस्तेमाल का तरीका
- कटोरी दोपहर के खाने के बाद खाएँ, सुबह बड़े जूस की तरह नहीं।
- मात्रा छोटी रखें, करीब एक कटोरी, आधे फल का ढेर नहीं।
- चबाकर खाएँ। कटोरी की जगह पपीते का जूस न रखें।
मददगार आदतें
- ऐसा फल चुनें जो हल्के दबाने पर दब जाए और मीठा महके, तेज़ या सड़ा नहीं।
- उस दिन नींबू खट्टा लगे तो पपीता सादा खाएँ।
सावधानियाँ
- कच्चा पपीता यह उपाय नहीं है। सिर्फ़ पका फल लें।
- मुँह में खुजली या त्वचा लाल हो तो रोक दें और अगली बार न लें।
- यह सहायक फल है, क्लींज नहीं और डॉक्टर का विकल्प नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पपीते का जूस बेहतर है?
- नहीं। उपाय दोपहर के खाने के बाद पके फल की छोटी कटोरी है, जूस क्लींज नहीं।
क्या रात को खा सकते हैं?
- विचार दोपहर के खाने के बाद का है। रात देर में बड़ी कटोरी आसानी से भारी लगती है।
पपीता अभी सख्त हो तो?
- पका और नरम होने तक रुकें। सख्त, कच्चा पपीता अलग खाद्य है।





