वज़न5 मिनट
भुना चना और मखाना: वज़न नियंत्रण के लिए समझदार स्नैक्स
ज़्यादातर वज़न स्नैक्स से चुपके से बढ़ता है: चाय के साथ बिस्कुट, नमकीन, चिप्स। इनकी जगह मुट्ठी भर भुना चना या मखाना कुरकुराहट और संतोष देता है, साथ में ज़्यादा प्रोटीन और रेशा — एक छोटा बदलाव जो धीरे-धीरे बड़ा असर करता है।

आयुर्वेद की दृष्टि से
आयुर्वेद आमतौर पर बार-बार खाने को ठीक नहीं मानता, क्योंकि इससे पिछला भोजन पच नहीं पाता। पर अगर भोजन के बीच कुछ चाहिए ही, तो कफ और वज़न की चिंता में हल्की, सूखी और भुनी चीज़ें बेहतर मानी जाती हैं। भुना चना पारंपरिक भारतीय नाश्ता है जो पेट भरता है और सस्ता है; मखाना हल्का, कुरकुरा और आसानी से स्वाद बदलने लायक है।
सामग्री
- छोटी मुट्ठी (लगभग 30 ग्राम) भुना चना, छिलके के साथ या बिना
- या 1 कप मखाना
- मखाने के लिए ½ छोटा चम्मच घी, चुटकी भर हल्दी, काली मिर्च और सेंधा नमक
बनाने की विधि
- भुना चना ऐसे ही खाएँ, या थोड़ा नींबू, कटा प्याज़, टमाटर और धनिया मिलाकर चाट बना लें।
- मखाने के लिए कड़ाही में घी गरम करें, मखाना डालें और धीमी आँच पर 6–8 मिनट कुरकुरा होने तक भूनें। हल्दी, काली मिर्च और नमक छिड़कें।
इस्तेमाल का तरीका
- तले या मीठे स्नैक्स की जगह सुबह के बीच में या शाम को एक छोटी कटोरी लें।
- मीठी चाय की जगह ग्रीन टी, छाछ या नींबू पानी के साथ लें।
- मखाना एयरटाइट डिब्बे में एक हफ़्ते तक रखें।
मददगार आदतें
- पैकेट से सीधे खाने के बजाय छोटी कटोरियों में पहले से हिस्सा निकाल लें।
- ख़ुद से पूछें कि भूख है या बस ऊब; अक्सर एक गिलास पानी या छोटी सैर जवाब दे देती है।
सावधानियाँ
- कुछ लोगों को चने से गैस होती है — थोड़े से शुरू करें और पानी पिएँ।
- हाई बीपी या किडनी रोग हो तो नमक कम रखें; किडनी रोग में प्रोटीन की मात्रा भी डॉक्टर से पूछें।
- बहुत छोटे बच्चों के लिए साबुत भुना चना और मखाना गले में अटक सकता है।



