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कनपटी और तलवों पर गुनगुना तिल का तेल

थोड़ा गुनगुना तिल का तेल कनपटी और तलवों पर मलते हैं। तेल आँखों से बाहर रहता है। यह छोटी शाम की राहत है, सिरदर्द या अनिद्रा का इलाज नहीं।

लकड़ी की रसोई मेज पर गुनगुने तिल के तेल की छोटी कटोरी और मुड़ा हुआ सूती कपड़ा।

कनपटी और तलवे, तेल आँख से दूर

इस आदत में तिल का तेल ज्यादा से ज्यादा एक छोटी चम्मच, इतना गुनगुना कि हल्का लगे। साफ उँगलियों से कुछ बूँदें कनपटी पर जाती हैं। बाकी तलवों पर। आँखें कनपटी के पास हैं, इसलिए हाथ धीमा रहे और तेल भौंह के बगल की त्वचा पर रहे, पलकों पर कभी नहीं।

तेल आँख के पास जाए तो रुकें, त्वचा पोंछें और सादे पानी से धोएँ। बिस्तर या चेहरा छूने से पहले हाथ धोएँ। कटी त्वचा पर छोड़ दें। यह मालिश माइग्रेन, रक्तचाप या अनिद्रा का इलाज नहीं करती।

सामग्री

  • एक छोटी चम्मच गुनगुना तिल का तेल
  • उसी में से कुछ बूँदें कनपटी के लिए
  • बचा तिल का तेल तलवों के लिए

बनाने की विधि

  1. तिल का तेल इतना गुनगुना करें कि कलाई के अंदर हल्का लगे, गर्म नहीं।
  2. हाथ धोकर सुखाएँ ताकि धूल कनपटी पर न जाए।

इस्तेमाल का तरीका

  • कुछ बूँदें कनपटी पर छोटे घेरे में मलें, आँखों से काफी दूर।
  • बाकी दोनों तलवों पर लगाएँ। चादर बचानी हो तो मोज़े पहन लें।
  • तुरंत हाथ धोएँ ताकि बाद में तेल आँखों तक न पहुँचे।

मददगार आदतें

  • एक छोटी चम्मच कनपटी और तलवों के लिए काफी है। पूरा चेहरा तेल से भरने की जरूरत नहीं।
  • तेल तेज गंध दे तो पुराना हो सकता है। ताजा सादा तिल का तेल लें।

सावधानियाँ

  • तिल का तेल आँखों से बाहर रखें। लग जाए तो सादे पानी से धोएँ।
  • कटी, संक्रमित या अभी छिली त्वचा पर तेल न मलें।
  • यह सिरदर्द, अनिद्रा या किसी बीमारी का इलाज नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

तिल का तेल कहाँ लगता है?

सिर्फ कनपटी और तलवों पर। पलकों पर या आँख के अंदर नहीं।

तेल आँख में चला जाए तो?

मालिश रोकें और आँख सादे पानी से धोएँ। पतला करने के लिए दूसरा तेल न डालें।

तेल कितना काफी है?

करीब एक छोटी चम्मच गुनगुना तेल, कनपटी और तलवों में बाँटकर।
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