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नीम के पानी से गरारा

नीम के पत्ते उबालें, पानी गुनगुना करें, और गरारा करें। सब थूक दें। नीम का पानी न निगलें। यह संक्रमण का इलाज नहीं।

रसोई के चूल्हे पर स्टील की पतीली में पानी और नीम के पत्तों की एक मुट्ठी, पास में छन्नी और कप।

नीम का गरारा, जिसे न निगलें

नीम बहुत कड़वा होता है, और यही कड़वाहट इसे पेय नहीं, गरारा रखने की वजह है। छोटा गरारा मुँह के पिछले हिस्से तक जाता है और फिर सिंक में थूक दिया जाता है।

जितने पत्ते पहचान सकें, उतनी छोटी मात्रा लें। मुँह में नीम का तेल न डालें। कड़वा तेल यह तरीका नहीं और निगलने पर असुरक्षित है। बुखार, गले की सूजन या साँस में तकलीफ हो तो तुरंत देखभाल चाहिए, एक और गरारा नहीं।

सामग्री

  • नीम के पत्तों की एक छोटी मुट्ठी
  • 2 कप पानी
  • नीम का गरारा अभी भी बहुत गर्म हो तो ठंडा करने के लिए और पानी

बनाने की विधि

  1. नीम के पत्ते धोकर करीब 8 मिनट पानी में उबालें।
  2. छानकर गुनगुना करें, इतना गर्म कभी नहीं कि मुँह जले।

इस्तेमाल का तरीका

  • एक घूँट 15 से 20 सेकंड गरारा करें और थूक दें।
  • स्वाद सहनीय हो तो एक बार और करें, फिर रुक जाएँ।
  • बाद में सादे पानी से कुल्ला करें और उसे भी थूक दें।

मददगार आदतें

  • सिंक के पास गरारा करने से निगलना आसान नहीं रहता।
  • बहुत कड़वा हो तो गुनगुने पानी से पतला करें। शक्कर न डालें।

सावधानियाँ

  • नीम का गरारा न निगलें। थूक दें।
  • मुँह में नीम का तेल न डालें।
  • यह गले के संक्रमण या दाँत के फोड़े का इलाज नहीं। तबीयत खराब हो तो देखभाल लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गरारे के बाद नीम का पानी पी सकते हैं?

नहीं। न निगलें। गरारा थूक दें, फिर सादे पानी का कुल्ला भी थूक दें।

क्या नीम का तेल इसी गरारे जैसा है?

नहीं। मुँह में नीम का तेल न डालें। यह तरीका केवल पानी में उबले पत्ते हैं।

क्या नीम का गरारा गले का संक्रमण मिटाता है?

नहीं। बुखार, सूजन या साँस की तकलीफ पर तुरंत देखभाल चाहिए, और गरारा नहीं।
सभी देखें: दाँतों और मसूड़ों के घरेलू उपाय