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छाती और तलवों पर गुनगुना तिल का तेल

एक चम्मच तिल का तेल केवल सुहावना गुनगुना करके छाती और तलवों पर लगाया जाता है। केवल बाहर।

लकड़ी की मेज पर तिल के तेल का छोटा कटोरा और मुड़ा सूती कपड़ा, पास में तेल की बोतल।

तिल के तेल की मालिश, केवल बाहर

जुकाम के समय छाती और तलवों पर तिल के तेल की पतली परत सोते वक्त का सादा सहारा है। तेल त्वचा पर ही रहता है। उसे नाक, मुंह या कान में नहीं डाला जाता और दवा की तरह पिया भी नहीं जाता। बात केवल हल्की गर्मी की है, खांसी या जकड़न मिटाने की नहीं।

तेल की ठंडक गर्म पानी की मदद से उतारें। कलाई पर वह सुहावना लगे, गर्म नहीं। इसे बच्चे की मालिश न बनाएं। खांसी कुछ दिनों से आगे रहे, बुखार चढ़े, या सांस भारी हो तो और तेल लगाने के बजाय डॉक्टर से मिलें।

सामग्री

  • एक चम्मच तिल का तेल
  • साफ मुलायम कपड़ा
  • तेल की ठंडक उतारने के लिए एक कप गर्म पानी

बनाने की विधि

  1. तिल के तेल वाली चम्मच को गर्म पानी में तब तक रखें जब तक तेल सुहावना गुनगुना हो, गर्म नहीं।
  2. एक बूंद कलाई पर जांच लें। पसीने वाली त्वचा हो तो पहले थपथपाकर सुखा लें।

इस्तेमाल का तरीका

  • छाती और तलवों पर पतली परत मलें। तेल नाक, मुंह या कान में न डालें।
  • चाहें तो पुरानी सूती बनियान पहन लें और बचा तेल कपड़े से पोंछ दें।
  • आराम से पहले एक बार काफी है। यह मालिश केवल बाहर के लिए है।

मददगार आदतें

  • गर्म तेल जलाता है। हल्का गुनगुना करें और पहले जांच लें।
  • वही सादा तिल का तेल लें जिस पर रसोई में भरोसा हो।

सावधानियाँ

  • केवल बाहर। जुकाम की दवा की तरह न पिएं और कान या नाक में न डालें।
  • कटी त्वचा, चकत्ते या तेल से एलर्जी हो तो छोड़ दें। चुभे तो रोक दें। बच्चे की मालिश के लिए नहीं।
  • खांसी कुछ दिनों से आगे रहे, बुखार हो, या सांस फूलने लगे तो डॉक्टर को दिखाएं, तेल बढ़ाने से काम नहीं चलेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या खांसी में यह तेल पिया जाता है?

नहीं। यह उपाय केवल त्वचा पर मलने के लिए है।

क्या बच्चे पर लगा सकते हैं?

नहीं। शिशु पर यह गुनगुना तेल न मलें।

क्या मालिश जुकाम ठीक कर देती है?

नहीं। यह केवल बाहर की हल्की गर्मी है। खांसी बनी रहे तो डॉक्टर से मिलें।
सभी देखें: सर्दी-खांसी के घरेलू उपाय